भागमभाग वाली दुनिया में जंक फूड, तनाव और बैठे रहने की आदतें स्वास्थ्य को चोट पहुंचा रही हैं। प्राचीन भारतीय योग इन समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है, जिसमें आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित उड्डियान बंध प्रमुख है।
यह मात्र शारीरिक क्रिया नहीं, अपितु आंतरिक शुद्धिकरण की विद्या है, जो पेट की क्रियाओं को सुदृढ़ करती है और मांसपेशियों को टाइट बनाती है। ‘उदर तालिका’ के नाम से प्रसिद्ध यह आसन जीवन में शामिल करने योग्य है।
अभ्यास प्रक्रिया सरल किंतु प्रभावी: स्थिर आसन में बैठें, हांथ घुटनों पर, श्वास पूरी बाहर निकालें। संक्षिप्त अंतःप्राणायाम कर जालंधर बंध बांधें। नाभि क्षेत्र को पीछे व ऊर्ध्व खींचें।
श्वास रोककर सहन करें, बंध मुक्त करें, श्वास लें और सामान्य अवस्था में आएं। प्रतिदिन करने से पाचन सुधरता है, प्राणशक्ति जागृत होती है और मानसिक स्पष्टता आती है।
पूर्ण नि:श्वास के पश्चात उदर संकोचन वाली यह विधि योग की श्रेष्ठ उपलब्धि है। स्वास्थ्य लाभ के लिए इसे अपनी दिनचर्या में उतारें।