हर कोई पालक की तारीफ करता है—खून की कमी दूर करने से लेकर आंखों की रोशनी तक। लेकिन आयुर्वेद की नजर में यह दोहरी तलवार है। कुछ लोगों के लिए पालक पथरी, जोड़ों का दर्द और पाचन विकार ला सकता है। आइए जानें किन्हें इससे दूर रहना चाहिए।
ऑक्सलेट से भरपूर पालक किडनी में कैल्शियम क्रिस्टल बनाता है, जो पथरी का रूप ले लेते हैं। पथरी पीड़ितों को सख्ती से पालक बंद करना पड़ता है, वरना दर्द बढ़ता जाता है।
बार-बार यूटीआई हो रही है? पालक मूत्र नलिकाओं को ब्लॉक कर संक्रमण को बदतर बनाता है। इससे पथरी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है—परहेज ही समाधान है।
अगर भोजन हजम करने में देरी होती है, तो पालक पेट में जमा होकर टॉक्सिन्स पैदा करता है। नतीजा—भारीपन, अपच और हानिकारक जीवाणुओं का विकास। आयुर्वेद कमजोर पाचन अग्नि वालों को हल्की सब्जियां चुनने की सलाह देता है।
कफ प्रधान शरीर में पालक बलगम बढ़ाता है, जिससे खांसी-जुकाम की समस्या। वात अधिकता पर जोड़ों में अकड़न, फ्लैटुलेंस होता है। दोषों का संतुलन बनाए रखें।
आहार में विविधता लाएं। आयुर्वेदिक चिकित्सक से अपनी बॉडी टाइप जांचवाएं। पालक को समझदारी से इस्तेमाल करें, न कि अंधेरे में तीर चलाएं। निरोगी जीवन की कुंजी जागरूकता है।