फरवरी का महीना आते ही मौसम अपनी करवटें बदलने लगता है, और बच्चे सबसे पहले चपेट में आ जाते हैं। ठंडी सुबहें, गर्मी दोपहरें और ठंडी शामें—यह उतार-चढ़ाव उनकी इम्यूनिटी को चुनौती देता है। आयुर्वेद में दोष असंतुलन, विज्ञान में कमजोर प्रतिरक्षा को जिम्मेदार ठहराते हैं। सर्दी, जुकाम, खांसी जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं।
समाधान है दैनिक आदतों में सुधार। आहार को पौष्टिक बनाएं—पालक, गाजर, संतरे, मूंग दाल, दही और रोटी। प्रोटीन-विटामिन से भरपूर ये भोजन रोगों से लड़ने की ताकत देते हैं। जंक फूड त्यागें, जो आंतों को कमजोर करता है। उबला पानी या सूप पिएं।
हाथ धोना सीखें। भोजन पूर्व, बाहरी धूल से लौटकर और टॉयलेट के बाद अच्छी तरह साफ करें। स्वच्छता संक्रमणों का दुश्मन है।
हाइड्रेशन बनाए रखें। बार-बार पानी पिलाएं, साथ ही घरेलू शरबत, लस्सी या नारियल पानी। ये डिटॉक्स करते हैं।
नींद पूरी हो। रात में गहरी नींद इम्यून सिस्टम को रिचार्ज करती है। नियमित समय-सूची अपनाएं।
इन उपायों से बच्चे मौसम की मार झेल सकेंगे। माता-पिता की सतर्कता से उनका बचपन स्वस्थ रहेगा।