आईआईटी रुड़की ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यापक नीति का मसौदा शुरू किया है। यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ती चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है।
वेलनेस सेंटर के नेतृत्व में बने इस ड्राफ्ट को डीन स्टूडेंट वेलफेयर, मनोवैज्ञानिक, सलाहकारों और प्रोफेसरों ने समृद्ध किया। नीति छात्र, शिक्षक और स्टाफ सबके लिए होगी।
सहयोग 2.0 कार्यक्रम ने अन्य आईआईटी के अनुभव साझा किए, जो सुप्रीम कोर्ट-यूजीसी दिशानिर्देशों से प्रेरित है। चर्चा में नीति कार्यान्वयन, आपदा प्रबंधन, काउंसलिंग भूमिका और एकसमान एसओपी पर जोर रहा।
सभी आईआईटी के अलावा एम्स, जीएमसी चंडीगढ़, आईएचबीएएस, टाटा इंस्टीट्यूट, जिंदल यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी और पुलिस विशेषज्ञों ने भाग लिया। सुप्रीम कोर्ट वकील व मानवशास्त्री की उपस्थिति विशेष रही।
प्रो. केके पंत ने जोर दिया, ‘मानसिक कल्याण शिक्षा का अभिन्न अंग है। ऐसी पहलें संस्थानों की जिम्मेदारी निभाती हैं।’
यह प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर मानक स्थापित करेगा, छात्रों को तनावमुक्त वातावरण देगा।