सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समय-सीमा लांघ जाने के बावजूद चेन्नई में आवारा कुत्तों को सार्वजनिक जगहों से हटाने का अभियान ठप पड़ा है। ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन शेल्टरों की किल्लत से जूझ रहा है, जिससे प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई।
नवंबर 2023 के फैसले में अदालत ने नागरिक निकायों को निर्देश दिया कि वे लोगों की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को दूर करें। दिसंबर में जीसीसी ने प्रति कुत्ते 50 रुपये दैनिक भोजन भत्ता और बड़े शेल्टरों के लिए 750 रुपये की योजना पेश की।
वित्तीय प्रोत्साहन के बावजूद एनजीओ आगे नहीं आ रहे—जगह और सुविधाओं का अभाव बाधा। सभी अधिकृत शेल्टर फुल कैपेसिटी पर हैं। टीएनएडब्ल्यूबी की आठ एनजीओ सूची व्यर्थ, क्योंकि कोई जगह नहीं।
दो संस्थाओं से चर्चा चल रही है, बाहरी इलाकों में भी यही हाल। मद्रास हाईकोर्ट से हालिया 40 कुत्तों का सफाया—21 नेम्मेली शेल्टर, शेष एडॉप्टेड। कुत्ता जनगणना सर्वे शुरू होने बाकी।
जीसीसी ने माधवरम-वेलachery में 250-250 क्षमता वाले विशेष शेल्टरों के लिए भूमि आवंटित की, रेबीजग्रस्त व आक्रामक कुत्तों के लिए। एनजीओ टेंडर मार्च तक तैयार। यह विलंब जनसुरक्षा को खतरे में डाल रहा है—त्वरित समाधान आवश्यक।