फरवरी सिर्फ त्योहारों का महीना नहीं, बल्कि संक्रमणों का केंद्र भी बन जाता है। सर्दी के अंत और गर्मी की शुरुआत में शरीर असंतुलित हो जाता है। धूप में गर्माहट और हवाओं में सिहरन से इम्यून सिस्टम चरमरा जाता है।
दिन में ठंडे ड्रिंक्स का लोभ संभालना मुश्किल होता है, लेकिन यही हल्की ठंड रोगों को न्योता देती है। वायरस-बैक्टीरिया के लिए ये हालात आदर्श हैं, फलस्वरूप फरवरी-मार्च में फ्लू, टाइफॉइड के केस चरम पर पहुंचते हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञ गिलोय व तुलसी का काढ़ा सुझाते हैं। रोजाना पीने से रोग प्रतिरक्षा मजबूत होती है। सोंठ में शहद मिलाकर खाएं, खांसी-कफ में तुरंत राहत मिलेगी।
गुनगुना पानी ही पिएं, ठंडे पदार्थों से दूर रहें। सर्दी जैसा आहार जारी रखें, हल्के कपड़ों से सावधान।
इन सरल तरीकों से ऋतु संधि को पार करें, बीमारियों से मुक्त रहें।