राज्यसभा की बैठक में शुक्रवार को सुधा मूर्ति ने फुट रिफ्लेक्सोलॉजी पर चर्चा छेड़ी। उन्होंने इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को भारत की आयुष व्यवस्था में समाहित करने की पुरजोर वकालत की। पैरों के विशिष्ट बिंदुओं से जुड़ी यह विधि बिना दवा के स्वास्थ्य लाभ देती है।
मूर्ति ने जोर देकर कहा कि पैरों को नजरअंदाज करना बड़ी भूल है। इनके पॉइंट्स दबाव से दर्द, तनाव दूर होते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में थाईलैंड से वियतनाम तक यह प्रमाणित उपचार है।
भारतीय मालिश परंपरा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर हमारी मसाज मशहूर है, उसी तरह फुट रिफ्लेक्सोलॉजी क्षेत्रीय विशेषता है। वृद्धजनों के लिए आदर्श यह तरीका जोखिम मुक्त है।
सरकार से मांग की कि आयुष के तहत प्रशिक्षित स्टाफ के साथ इसे संस्थागत करें। भारत में डायबिटीज महामारी के संदर्भ में पैरों की संवेदनशीलता घातक साबित हो रही है। अस्पतालों में विशेष विभाग बनें।
इस व्यवस्था से रोग निवारण, कारण समझ और तत्काल उपचार सुनिश्चित होगा। अंत में मूर्ति ने स्वास्थ्य नीति में पैर देखभाल को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।