हर महीने पीरियड्स के समय पेट में मरोड़, सूजन और असहनीय पीड़ा महिलाओं को परेशान करती है। दवाओं पर निर्भर रहना स्वस्थ नहीं। गर्भासन योगासन इस समस्या का प्राकृतिक हल है जो शरीर को अंदर से सशक्त बनाता है।
रोजाना करने से गर्भाशय स्वस्थ रहता है, चक्र नियमित होता है और ऐंठन घुल जाती है। मानसिक तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है। यह आसन विशेष रूप से स्त्री स्वास्थ्य के लिए वरदान है।
नाम से ही स्पष्ट है—गर्भ यानी भ्रूण, आसन यानी मुद्रा। भ्रूण की भांति शारीरिक स्थिति तन-मन को नवजीवन देती है। प्रमुख योग संस्थानों ने इसे माहवारी दर्द निवारक घोषित किया है।
तैयारी के लिए कुक्कटासन जरूरी। पद्मासन में विराजें, बाहें जांघों-पिंडलियों के मध्य प्रविष्ट करें, कोहनियां फैलाएं, कान पकड़ें। 30-60 सेकंड धारण करें। सांस पर नियंत्रण रखें।
उपवास की सुबह आदर्श समय। कंधे-कमर की समस्या हो तो विशेषज्ञ मार्गदर्शन लें। गर्भासन से प्राप्त लाभ जीवनशैली को बदल देंगे।