भागमभाग वाली जिंदगी ने थकान, चिंता और गले की दिक्कतों को आम बना दिया है। अनियमित दिनचर्या से आवाज प्रभावित होना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर व मन के असंतुलन से ये शुरू होता है। ग्रंथित मुद्रा योग का सरल नुस्खा है राहत का।
हाथों से की जाने वाली यह मुद्रा गले, दिमाग और नाड़ियों को लक्षित करती है। नियमित अभ्यास से आराम मिलता है, शांति छा जाती है।
पहले गले पर असर: लगातार खराबी, आवाज का बैठना या बोलते हुए थकान दूर होती है। खून का प्रवाह सुधरने से भारीपन जाता है।
स्ट्रेस रिलीज में बेस्ट। अंदरूनी तनाव बेचैनी बन जाता है, लेकिन गहरी呼吸 से मन स्थिर होता है।
अच्छी नींद के लिए उपयोगी। रात भर जागना या टूटती नींद की समस्या हल हो जाती है। रात को करने से बेहतर परिणाम।
एकाग्रता और यादशक्ति मजबूत होती है। पढ़ाई या काम में फोकस बना रहता है।
भावनात्मक हल्कापन आता है, गुस्सा काबू में, विश्वास बढ़ता है। स्वाभाविक बातचीत संभव होती है।
प्रातः या सायं शांत वातावरण में 10-15 मिनट का अभ्यास काफी। अपनाएं यह मुद्रा स्वस्थ जीवन के लिए।