भुज के मिलिट्री हॉस्पिटल में भारतीय सेना ने कमाल कर दिखाया। तीन दिनों के आई सर्जरी कैंप से कच्छ के 200 से ज्यादा लोगों, जिनमें वीर पूर्व सैनिक और दूर के गांववासी शामिल हैं, को अंधेरे से आजादी मिली। आंखों की रोशनी लौटने से उनके चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई।
दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम ने 2500 से अधिक लोगों की आंखों की जांच की। एडवांस्ड मोतियाबिंद सर्जरी से न केवल दृष्टि बहाल हुई, बल्कि अन्य नेत्र रोगों का भी शीघ्र निदान संभव हुआ।
दक्षिणी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने दौरा कर मरीजों व डॉक्टरों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘ये प्रयास जीवन की गुणवत्ता बदलते हैं।’ मेडिकल टीम के समर्पण की तारीफ की।
प्रसिद्ध सर्जन ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में चली यह मुहिम। उनके पास एक लाख सफल सर्जरी का रिकॉर्ड है। कच्छ के दुर्गम इलाकों तक पहुंचकर सेना ने चिकित्सा की नई मिसाल कायम की।
सीमा क्षेत्रों में चलाए जा रहे यह कार्यक्रम सेना की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने बताया कि भविष्य में भी ऐसी सेवाएं जारी रहेंगी, जो स्थानीय लोगों से गहरे बंधन जोड़ेंगी।
सेवा परंपरा से प्रेरित सेना के ये कदम सीमांत जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार कर रहे हैं। कच्छ कैंप उन वंचितों के लिए उम्मीद की किरण है, जहां गुणवत्ता चिकित्सा पहुंचना मुश्किल था।