दुनिया भर में कैंसर एक भयानक महामारी की तरह फैल रहा है, जो न केवल जीवन छीन रहा बल्कि परिवारों को तोड़ भी रहा है। 2022 में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में 1.9 मिलियन नए केस आए और 1.3 मिलियन लोग कैंसर से अकाल मृत्यु के शिकार हुए, जिसमें बच्चों के 56 हजार से ज्यादा मामले शामिल थे। इलाज में प्रगति होने पर भी, 2050 तक आंकड़े दोगुने होने का खतरा है।
डब्ल्यूएचओ की डॉ. कैथरीना बोहेम के अनुसार, विश्व कैंसर दिवस का नया थीम ‘यूनाइटेड बाय यूनिक’ हर व्यक्ति, शहर और देश के अनूठे प्रभाव को रेखांकित करता है। एकजुट होकर स्थानीय स्तर पर योजनाएं बनानी होंगी।
2024-2030 की डब्ल्यूएचओ रणनीति के तहत देश राष्ट्रीय प्लान तैयार कर रहे हैं, कैंसर रजिस्ट्री सुधार रहे हैं, प्रारंभिक जांच बढ़ा रहे हैं और अंतिम चरण की देखभाल आसान बना रहे हैं। वैश्विक एजेंसियों के सहयोग से डेटा विश्लेषण हो रहा है।
बच्चों के कैंसर के लिए एसईएआर-सीसीएन और सीकैन ग्रिड जैसे नेटवर्क सक्रिय हैं। थाईलैंड की योजना, भारत के डे-केयर सेंटर, भूटान का डेटा संग्रह, म्यांमार, नेपाल और श्रीलंका की पहलें प्रेरणादायक हैं।
क्षेत्र में मृत्यु अनुपात चिंताजनक है—उच्च आय देशों से दोगुना, बच्चों में तीन गुना। योजनाओं की कमी, कम स्क्रीनिंग और असमान सेवाएं बाधा हैं। अब ठोस राजनीतिक समर्थन और दीर्घकालिक बजट जरूरी है।