2026-27 का केंद्रीय बजट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयुर्वेद को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल टूरिज्म और आधुनिक चिकित्सा को सशक्त बनाने वाली घोषणाएं की हैं।
एआईआईए निदेशक प्रो. पीके प्रजापति ने बजट की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने पीएम मोदी के कार्यकाल को आयुर्वेद के स्वर्णिम दौर करार दिया। “ये प्रावधान स्वास्थ्य की बदलती जरूरतों को पूरा करते हैं,” उन्होंने जोर दिया।
तीन नए ऑल इंडिया आयुर्वेद संस्थान और एआईआईएमएस, फार्मा शिक्षा केंद्रों का विकास, 1000 ट्रायल साइट्स जैसी योजनाएं देशव्यापी बदलाव लाएंगी।
विदेशों से मरीज यूनानी, आयुर्वेद, होम्योपैथी के लिए आते हैं, जिन्हें अब मजबूत समर्थन मिलेगा। होलिस्टिक आयुर्वेद पर फोकस शरीर-आत्मा के संतुलन को बढ़ावा देगा।
पांच मेडिकल हब, अस्पताल उन्नयन, इमरजेंसी सेवाएं और मानसिक स्वास्थ्य संस्थान नई जान डालेंगे। आयुष मंत्रालय के सहयोग से यह संभव हुआ।
यह बजट न केवल अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि भारत को मेडिकल टूरिज्म का हब भी घोषित करेगा। प्रो. प्रजापति ने सभी प्रयासों की सराहना की।