प्राचीन आयुर्वेद में धातु भस्में रोग नाश की शक्तिशाली औषधियां हैं। हीरा भस्म इन्हीं में सर्वोच्च है, जो दोष संतुलन कर शरीर को अभेद्य वज्र सा बनाती है। कैंसर से हृदय विकार तक, इसके लाभ असंख्य हैं।
शुद्ध हीरे पर आधारित यह भस्म गंधक, रस सिंदूर और जड़ी-बूटियों से संयोजित होकर 14 चक्रों की अग्नि शुद्धि से तैयार होती है। हवारहित डिब्बों में यह प्रक्रिया विषाक्तता समाप्त कर औषधीय गुण जागृत करती है। इसकी दुर्लभता इसकी ऊंची कीमत में झलकती है।
दिल की कमजोरी दूर कर रक्त प्रवाह नियंत्रित करती है। श्वास कष्ट, मधुमेह नियंत्रण, स्थूलता हरण, संतानहीनता निवारण तथा भड़कावट वाली बीमारियों में प्रभावी। अनेमिया, क्षय, ट्यूमर और कैंसर जैसे गंभीर रोगों में सहायक। गठिया पीड़ा मिटाती है तथा हड्डी-मज्जा को पुष्ट करती है।
प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत कर ऊर्जा प्रदान करती है। मानसिक स्पष्टता, स्मरण शक्ति व ध्यान केंद्रण बढ़ाती है। नर देह की कमजोरियां समाप्त करती है। सदियों पुरानी यह औषधि दीर्घायु और स्वस्थ जीवन का आधार है। चिकित्सक परामर्श अनिवार्य। आयुर्वेद का यह रत्न स्वास्थ्य का अनमोल रत्न है।