मौसम बदलने पर बीमारियां बढ़ जाती हैं, ऐसा हम सोचते हैं। हकीकत में शरीर की आंतरिक कमजोरी ही मुख्य कारण है। दवाओं से क्षणिक राहत मिलती है, लेकिन जड़ पर प्रहार जरूरी। वह जड़ है हमारी दिनचर्या।
गलत रूटीन शरीर को रोगप्रिय बना देता है। लक्षण आने से पूर्व ही समस्या पनप चुकी होती है। अष्टांग योग के अनुसार दिनचर्या अपनाकर रोग预防 किया जा सकता है। यह ग्रंथ जीवन पद्धति सिखाता है।
सुबह जल्दी उठें, प्रकृति का नियम पालें। गुनगुना पानी से detox करें – पाचन तेज होता है, आम दोष संतुलित रहता है।
मुंह की सफाई भोजन से पहले करें। जीभ की सफाई पेट की रक्षा करती है। ऑयल पुलिंग से दांत स्वस्थ, मुस्कान चमकदार।
व्यायाम से शरीर प्रफुल्लित हो, ऑक्सीजन हर कोशिका तक पहुंचे। पानी और आहार चिकित्सकीय दृष्टि से लें।
यह सरल परिवर्तन चमत्कारिक हैं। रोग से लड़ाई छोड़ें, शुद्ध जीवन जिएं। स्वास्थ्य आपके हाथ में है।