जीवनशैली में बदलाव से त्वचा रोगों ने महामारी का रूप ले लिया है। पौष्टिक भोजन की कमी से रक्त दूषित हो रहा है, जो पित्त असंतुलन के साथ त्वचा पर असर दिखा रहा है। आयुर्वेद इनकी जड़ को लक्षित कर स्थायी समाधान देता है।
हल्की खुजली या फंगस पर नारियल तेल व भीम कपूर का मिश्रण असरदार। गंभीर दाद, एक्जिमा के लिए रात्रि में नीम, मंजिष्ठा, हरीतकी, हल्दी युक्त लेप लगाएं। यह जलन कम कर त्वचा को पोषण देता है।
आंतरिक उपचार में खदिरारिष्ट प्रमुख। चिकित्सक परामर्श से रात को पिएं, यह विषाक्त पदार्थ बाहर निकालता है। पित्त शांत करने हेतु कड़वे पत्ते, नारियल पानी और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
नियमित अभ्यंग, detoxification और संतुलित दिनचर्या से त्वचा चमकदार बनेगी। आयुर्वेद साबित करता है कि बाहरी सौंदर्य भीतर की सेहत पर निर्भर है। अपनाएं और अनुभव करें बदलाव।