मानसिक कोहरा यानी ब्रेन फॉग को हल्के में न लें। यह न सिर्फ तनाव का परिणाम हो सकता है, बल्कि हृदय रोग की पूर्व चेतावनी भी। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल की मामूली खराबी दिमाग तक रक्त पहुंच को बाधित कर देती है, जिससे याददाश्त कमजोर पड़ती है और सोचने में आलस छा जाता है।
मस्तिष्क को लगातार ऑक्सीजन और पोषक तत्व चाहिए। जब हृदय पंपिंग में कमी करता है, तो ये सुविधाएं प्रभावित होती हैं। हालिया शोध बताते हैं कि ऐसे मामलों में ध्यान केंद्रण और निर्णय क्षमता में 20 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें। नियमित जांच जैसे हार्ट रेट मॉनिटरिंग, अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट कराएं। डाइट में ओमेगा-3 युक्त भोजन शामिल करें, योग और पैदल चलना अपनाएं।
जल्दी पहचानें, जल्दी इलाज शुरू करें। ब्रेन फॉग को दिल की पुकार समझें और स्वास्थ्य की रक्षा करें। स्वस्थ दिल से ही तेज दिमाग संभव है।