अफगानिस्तान के कैंसर रोगियों के लिए भारत से राहत की खबर। गुरुवार को काबुल में 7.5 टन महत्वपूर्ण कैंसर दवाओं का जखीरा पहुंचा, जो मरीजों की घोर आवश्यकताओं को संबोधित करेगा। विदेश मंत्रालय ने इस पहल की पुष्टि करते हुए अफगान भाइयों के प्रति समर्पण व्यक्त किया।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के एक्स पोस्ट में कहा गया, ‘जीवनरक्षक कैंसर दवाओं के 7.5 टन काबुल भेजे गए ताकि मरीजों को तत्काल सहायता मिले। भारत अफगानिस्तान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।’
पिछले माह नई दिल्ली में आयोजित स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक इसकी नींव है। मawlवी नूर जलाल जलाली और जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के रास्ते खोजे। चिकित्सा प्रशिक्षण, दवा आपूर्ति, कैंसर चिकित्सा, वीजा सुविधा और बुनियादी ढांचे पर विस्तृत बातचीत हुई।
जलाली ने भारत का धन्यवाद किया तथा स्वास्थ्य तंत्र सुधार के लिए अतिरिक्त मांगें रखीं। नड्डा ने काबुल के बाल अस्पताल हेतु सीटी स्कैनर भेजने की घोषणा की, जो दवाओं व वैक्सीन के साथ होगा।
चार सालों में 327 टन चिकित्सा सामग्री भारत ने दी है। रेडियोथेरेपी मशीनें व अन्य सहायता कार्य प्रगति पर हैं। नड्डा की पोस्ट में बैठक की सफलता का उल्लेख करते हुए भविष्योन्मुखी आपूर्ति पर जोर दिया गया।
पड़ोसी देश के रूप में भारत की यह मुद्रा दोनों राष्ट्रों के संबंधों को सुदृढ़ करती है। यह खेप न केवल दर्द कम करेगी बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सतत साझेदारी का प्रतीक बनेगी।