पड़ोसी देशों के बीच तनाव चरम पर है। अफगानिस्तान ने बुधवार को पाकिस्तान से आने वाली दवाओं पर 9 फरवरी के बाद पूरी तरह रोक लगा दी। वित्त मंत्रालय ने व्यापारियों से अपील की है कि 19 दिनों के अंदर सभी डील्स क्लियर कर लें, वरना कस्टम्स साफ मना कर देगा।
13 नवंबर के फैसले के मुताबिक, तीन महीने बाद यह लागू हो रहा है। 2024 के अंत में सीमा मार्ग बंद होने से बाजारों में हड़बड़ी मच गई है। 2600 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन पर झड़पें आम हैं, जिसमें 11 अक्टूबर की घटना ने शांति वार्ता को पटरी से उतार दिया।
अफगानिस्तान को पाकिस्तानी पोर्ट्स की जरूरत पड़ती है, लेकिन ईरानी रास्ता सहारा है। हाल के तालिबानी हमले पाक के हवाई हमलों का बदला थे। कतर-सऊदी-तुर्की की मध्यस्थता बेकार रही।
मुजाहिद ने पाक टीम के रवैये पर निशाना साधा, जो तुर्की में बातचीत फेल कर गया। बरादर ने पिछले साल व्यापारियों को पाक पर निर्भर न रहने की हिदायत दी, क्योंकि इस्लामाबाद व्यापार को हथियार बना रहा है।
इस कदम से दवा क्षेत्र प्रभावित होगा, लेकिन अफगानिस्तान वैकल्पिक रास्तों पर जोर दे रहा है। दोनों देशों के व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा, जो संबंधों की कमजोरी को उजागर करता है। भविष्य में नई रणनीतियां बनेंगी।