फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं का जलवा अब लेखन तक फैल चुका है। मजबूत संवाद और गहरी कहानियां गढ़ने वालीं अलंकृता, जूही, मेघना और गौरी जैसी लेखिकाएं पुरुषों के वर्चस्व को चुनौती दे रही हैं। उनकी रचनाएं समाज को आईना दिखाती हैं।
अलंकृता श्रीवास्तव की ‘लिपस्टिक…’ अंतरराष्ट्रीय हिट रही। प्रकाश झा की फिल्मों से सीखकर उन्होंने वेब सीरीज में धमाल मचाया। महिलाओं के मुद्दों पर उनकी नजर तीखी है।
जूही चतुर्वेदी ने ‘पीकू’ और ‘विक्की डोनर’ से पुरस्कार बटोरे। ‘मद्रास कैफे’ के डायलॉग्स यादगार। उनकी स्क्रिप्टें जिंदगी की सच्चाई पकड़ती हैं।
मेघना गुलजार की ‘राजी’, ‘छपाक’, ‘सैम बहादुर’ साहसी कहानियां हैं। सामाजिक मुद्दों पर उनकी पकड़ गजब।
गौरी शिंदे ने ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से मां की ताकत दिखाई, ‘डियर जिंदगी’ से रिश्तों की गहराई।
इनकी बदौलत बॉलीवुड की कहानियां अब अधिक सच्ची और प्रभावशाली हो गई हैं। भविष्य उज्ज्वल है।