मुंबई में अनिल कपूर स्टारर सूबेदार की धूम मची है। ओटीटी पर आई यह थ्रिलर अपनी पकड़दार स्क्रिप्ट, कलाकारों के दमदार रोल और जबरदस्त स्टंट्स के लिए सराही जा रही। मगर अनुराग कश्यप ने साफ कहा- इसे थिएटर्स में उतारना चाहिए था।
अपने इंस्टाग्राम पर शनिवार को पोस्ट डालते हुए कश्यप ने अनिल की तस्वीर के साथ लिखा, प्राइम पर तो देख ली, लेकिन सिनेमा हॉल का मजा अलग। एनामॉर्फिक शॉट्स बड़ी स्क्रीन पर जादू चलाते। भीड़ भाड़ में एंजॉयमेंट दुगना होता।
सुरेश त्रिवेणी को धन्यवाद देते हुए बोले कि बुंदेलखंड-चंबल का खुरदरा चेहरा बखूबी पेश किया। पितृसत्ता की दुनिया में सख्त औरतें, फूलन देवी जैसे चरित्र इसी मिट्टी से। इलाके के हालात बदतर हो चुके हैं।
पूर्व फौजी अर्जुन मौर्या की दास्तान पूरी तरह काल्पनिक लेकिन यकीन करने लायक। इसमें डरावना तनाव, खामोशी, तेज रफ्तार और हकीकत का संगम है। घर पर हेडफोन से देखा, थिएटर तो सपना सा लगे।
कास्ट की तहेदील से तारीफ। अनिल कपूर ने भीतरी आग जलाई। फैसल मलिक, मोना सिंह, विलेन आदित्य रावल, राधिका मदान कमाल। आदित्य से चिढ़ पैदा हो, राधिका ज्वालामुखी और कोमल दोनों। कल्लू मामा के दृश्य धमाकेदार।
कैमरा वर्क शानदार, हाईवे की दौड़ सच्ची लगे। ओवरड्रामैटिक एक्शन के जमाने में यह ताजगी लाता। टीम को बधाई। सूबेदार साबित करती है कि सच्ची फिल्में सिल्वर स्क्रीन की मोहताज हैं।