बॉलीवुड में ‘सत्या’ के कल्लू मामा का जलवा आज भी बरकरार है। सौरभ शुक्ला ने इस किरदार को इतना जीवंत किया कि नाम ही चिपक गया। हैरानी की बात ये कि वे सिर्फ एक्टर नहीं, फिल्म के स्टोरी राइटर भी थे। अनुराग कश्यप के साथ उनकी जोड़ी ने अंडरवर्ल्ड की दुनिया को स्क्रीन पर उतारा।
गोरखपुर में 5 मार्च 1963 का दिन। संगीतमय माहौल में पले सौरभ की मां जोगमाया तबला की धाकड़ वादक, पिता शत्रुघ्न आगरा घराने के उस्ताद। दिल्ली में बसने के बाद शिक्षा पूरी की।
स्टेज पर 1984 से धमाल मचाया। नाटकों ने अभिनय की बारीकियां सिखाईं। ‘बैंडिट क्वीन’ से फिल्मी सफर शुरू, छोटे रोल में बड़ा असर।
‘सत्या’ आई तो तहलका मच गया। कल्लू मामा की भयानकता होश उड़ा देने वाली। लेखन से जुड़ाव ने किरदार को और गहरा बनाया। फिर भी, अगली हिट का इंतजार।
‘बर्फी’ और फिर ‘जॉली एलएलबी’ का कमाल। जस्टिस त्रिपाठी ने हंसी-गुदगुदी के साथ पुरस्कार दिलाया। ‘पीके’, ‘रेड’ में नई ऊंचाइयां।
सौरभ का संघर्ष प्रेरणा है। कला के परिवार से निकलकर स्टेज, स्क्रिप्ट और सिल्वर स्क्रीन पर राज किया। उनका सफर बताता है—सपने देखो, मेहनत करो, कामयाबी तुम्हारी।