जब बात हिंदी फिल्मों के दिलकश गीतों की आती है तो संतोष आनंद का जिक्र अनिवार्य हो जाता है। लाइब्रेरियन की नौकरी छोड़कर उन्होंने ‘एक प्यार का नगमा है’ जैसे हिट गाने लिखे और दो फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते। उनकी कहानी संघर्ष और सफलता की अनूठी दास्तान है।
बुलंदशहर के सिकंदराबाद में 5 मार्च 1940 को जन्मे संतोष का मूल नाम संतोष कुमार मिश्र था। मध्यमवर्गीय परिवार में पलकर कविता ने उन्हें आकर्षित किया। लाइब्रेरी साइंस की पढ़ाई के बाद दिल्ली स्कूल में लाइब्रेरियन बने।
वहां किताबों के बीच कविताएं लिखीं और कवि सम्मेलनों में धूम मचाई। मनोज कुमार ने सुनकर ‘पूर्व और पश्चिम’ में मौका दिया। फिर ‘शोर’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों के गीतों ने शोहरत दिलाई।
‘मैं ना भूलूंगा’ से पहला फिल्मफेयर, ‘मोहब्बत है क्या चीज’ से दूसरा। 100 से ज्यादा गीतों में जीवन के रंग भरे। यश भारती जैसे सम्मान मिले। उनकी प्रेरणा आज भी नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करती है।