पचास साल के संगीत सफर को पूरा करने वाले हरिहरन ने अपनी यात्रा के राज खोले। उनकी जादुई आवाज ने भाषाओं की सीमाएं तोड़ीं और संगीत की विरासत को समृद्ध किया। विशेष बातचीत में उन्होंने आधुनिक चुनौतियों, सलाह और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
उभरते कलाकारों को चेतावनी दी, ‘इंस्टेंट फेम का भ्रम न पालें। संगीत शॉर्टकट नहीं, रोजमर्रा की जिंदगी है। अपनी आवाज की पहचान बनाएं, क्योंकि नकल क्षणिक होती है।’
रियाज को सबसे बड़ा शिक्षक बताया। ‘हर सुबह रियाज मेरी दिनचर्या का हिस्सा है। यह दोहराव को महारत में बदल देता है। मशीनें सहायक हैं, लेकिन गहराई रियाज से ही मिलती है।’
बदलते परिदृश्य पर बोले, ‘हर 5-10 साल में बाजार उलट-पुलट होता है। क्रिएटिविटी को तकनीक पर हावी रखें।’ ‘जान मेरी’ एल्बम इसका प्रमाण है, जहां राग और फ्यूजन का अनोखा मेल है।
फिल्म संगीत के साथ स्वतंत्रता का महत्व रेखांकित किया। ‘हर कलाकार का रास्ता अलग, लेकिन मेरे लिए संगीत अनंत है।’ नए सितारों पर कहा कि चुनौतियां स्वागतयोग्य हैं।
हरिहरन की बातें संगीत प्रेमियों के लिए अमूल्य हैं।