फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने एक्स पर तीखे लहजे में पारंपरिक शिक्षा पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि एआई ने याददाश्त की उपयोगिता समाप्त कर दी। अब रटना-दोहराना और नौकरी पाना वाला मॉडल अप्रासंगिक है।
पहले जब डेटा दुर्लभ था, तब रटना जरूरी था। डॉक्टर लक्षण भूलते नहीं थे, इंजीनियर फॉर्मूले कंठस्थ रखते। लेकिन एआई लाखों पेज तुरंत स्कैन कर देता। मेडिकल पढ़ाई के 10 साल व्यर्थ जब एआई डायग्नोसिस और रोबोट आपरेशन कर रहे।
माता-पिता क्यों बच्चों को ऐसे पथ पर धकेल रहे जहां नौकरियां गायब हो रही? खासकर गरीबों के बच्चे अज्ञानता का बलि चढ़ रहे। वर्मा बोले—शिक्षा के रक्षक जागें। बच्चों को एआई सिखाएं, पुरानी किताबी पढ़ाई छोड़ें।
शिक्षक सिलेबस का हवाला देते, माता-पिता भीड़ का। बच्चे सवाल करें तो दबा दिए जाते। वर्मा ने स्पष्ट किया—बड़े भूलों के शिकार हैं, बदलाव से डरते। लेकिन युवा अब विद्रोह करेंगे।
पुरानी व्यवस्था को खत्म करें वरना वह खात्म हो जाएगी। बिना प्लान के खालीपन न फैले, इसके लिए सोच-विचार और कठोर परिश्रम जरूरी। युवा न बड़ों की भूलों से हारें, अपना भविष्य खुद गढ़ें।