तारक मेहता का नाम गुजराती हास्य साहित्य में स्वर्ण अक्षरों से लिखा है। वे दुनिया को सीधे न देखकर उल्टे चश्मे से निहारते थे, समाज की कमियों पर मुस्कुराहट बिखेरते हुए। हास्य को कटु न बनाकर मीठा बनाने वाले इस कलमकार ने लाखों दिल जीते। उनकी पुण्यतिथि 1 मार्च को मनाई जाती है।
26 दिसंबर 1929, अहमदाबाद जन्म। गुजराती पत्रकारिता से प्रारंभ कर ‘चित्रलेखा’ में 1971 से ‘दुनिया ने उंधा चश्मा’ कॉलम चला। सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को हल्के हास्य से पेश कर पाठकों को सोचने पर विवश करते।
‘हास्य मीठा हो तो दिल छूता है,’ उनका मानना था। 80+ किताबें, नाटक अनुवाद, रंगमंच योगदान। करियर में नाट्य मंडल (1958), ‘प्रजातंत्र’ डिप्टी एडिटर, सरकारी सेवा।
‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ टीवी शो ने 2008 से गोकुलधाम की कहानियों से घर-घर हंसी बांटी। शैलेश लोढ़ा का किरदार अमर। पद्म श्री 2015। 1 मार्च 2017 को निधन, मगर विरासत चिरस्थायी।