बंगाली सिनेमा की नई पेशकश ‘छेलेधोरा’ मां के त्याग और कमजोरियों की अनकही कहानी लेकर आ रही है। यह इंडो-अमेरिकन फिल्म 1 मार्च से अरुणाचल प्रदेश के मनमोहक ईटानगर व जीरो वैली में बननी शुरू होगी। स्वास्तिका मुखर्जी बृष्टि बनी हैं, एक ऐसी मां जो भावुक फैसलों के कारण मुसीबतों में फंस जाती है।
बेटी के जन्मदिन पर बिना इजाजत उसे साथ ले जाने का इरादा भावनाओं से प्रेरित था, मगर अपहरण की घटना ने सबकुछ बदल दिया। स्वास्तिका के अनुसार, ‘बृष्टि पहली नजर में नापसंद लगेगी, लेकिन उसका ममत्व उसे अमर बना देगा। यह कमजोरी से उभरती शक्ति की गाथा है।’
फिल्म मां की तलाश के साथ-साथ आत्म-मंथन को रेखांकित करती है, जहां संकट माता-पिता को उनकी गलतियों का आईना दिखाते हैं। निर्देशक शिलादित्य मौलिक कहते हैं, ‘यह रोड ट्रिप जैसी यात्रा है, जिसमें उतार-चढ़ाव के बीच क्षमा और नई शुरुआत है। बच्चे बड़ों के गुरु बन जाते हैं।’
अरुणाचल न केवल अपनी वादियों के लिए मशहूर बल्कि योग्य कलाकारों के लिए भी जाना जाता है। टीम में 14 स्थानीय सदस्य शामिल हैं, जो फिल्म को सच्चाई का रंग देंगे।
‘छेलेधोरा’ दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगी कि विपत्ति में ही असली हिम्मत जागती है।