मशहूर फिल्म निर्देशक सुभाष घई ने सोशल मीडिया पर युवाओं के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी। अपनी हिट फिल्मों के टाइटल्स दिखाते हुए उन्होंने काम की महत्ता पर प्रकाश डाला। राम लखन से ताल तक की ये फिल्में साबित करती हैं कि सच्चा कला खुद बोलती है।
उन्होंने कहा कि आने वाले दौर में उपलब्धियां ही व्यक्ति को परिभाषित करेंगी। काम ऐसा हो जो उद्योग की सीमाओं से परे प्रेरित करे। क्रिएटर्स को कभी रुकना नहीं चाहिए, हमेशा नई ऊंचाइयों को छूना चाहिए।
एआई के संदर्भ में घई ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। इसे दुश्मन न मानकर सहायक टूल के रूप में अपनाएं। ‘यह आपकी तीसरी आंख बनेगी, जो अनोखे आइडिया और दृष्टिकोण प्रदान करेगी।’ रचनात्मकता को बढ़ावा देने में यह अहम भूमिका निभाएगा।
लंबे समय से बड़े पर्दे पर अनुपस्थित घई अब अपने संस्थान व्हिसलिंग वुड्स के माध्यम से सिनेमा की भविष्य गढ़ रहे हैं। उनका यह उपदेश तकनीकी परिवर्तनों के दौर में बेहद प्रासंगिक है।