70-80 के दशक में जब बॉलीवुड बदलाव के दौर से गुजर रहा था, तब मनमोहन देसाई ने ऐसी फिल्में रचीं जो दर्शकों को थिएटर्स में जकड़ लेतीं। एक्शन से भरपूर, भावुक कहानियां, हंसी-मजाक और परिवारिक पुनर्मिलन—यही उनकी सफलता का राज था। सात लगातार सिल्वर जंबली (25 हफ्ते) और चार गोल्डन जंबली (50 हफ्ते) का कीर्तिमान उनके नाम है।
मुंबई में 26 फरवरी 1937 को पैदा हुए मनमोहन को बचपन में ही आघात लगा। प्रोड्यूसर पिता कीकूभाई का निधन होने पर चार साल के बेटे पर कर्ज का पहाड़ टूट पड़ा। संपत्ति बिकवाकर गुजारा किया, जिसने उनकी रचनाओं में बिछड़न-मिलन की भावना उतारी।
भाई सुभाष ने इंडस्ट्री में एंट्री दिलाई। ‘छलिया’ से निर्देशन शुरूआत हुई, जिसमें राज कपूर और नूतन चमके। ‘तेरी राहों में खड़े हैं’ जैसे गाने सुपरहिट बने।
साल 1977 में चार हिट्स—’अमर अकबर एंथनी’, ‘धरम वीर’, ‘चाचा भतीजा’, ‘परवरिश’। ‘अमर अकबर एंथनी’ ने तो कमाल कर दिया, क्लासिक स्टेटस हासिल किया।
निजी जिंदगी में पत्नी की मौत ने तोड़ा, नंदा से सगाई हुई लेकिन शादी से पहले ही 1 मार्च 1994 को बालकनी हादसे में जान गंवाई। मनमोहन देसाई की विरासत बॉलीवुड की धरोहर है।