पंकज उधास की गजलें भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों पर ले गईं, खासकर ‘चिट्ठी आई है’ ने। 1986 की ‘नाम’ फिल्म का यह गीत रिकॉर्ड करते समय राज कपूर की आंखें भर आईं, जो उनके करियर का सबसे यादगार पल बन गया।
पंकज शुरू में इस गाने को हल्के में ले रहे थे। लेकिन राज कपूर की जिद पर उन्होंने गाया और कमाल कर दिया। कपूर साहब इतने प्रभावित हुए कि बोले- यह एहसास सिर्फ तुम्हारी आवाज में ही उतरेगा। यह तारीफ पंकज के लिए मील का पत्थर बनी।
गाने की रिलीज के बाद पंकज को गजल कॉन्सर्ट्स और फिल्मों में जगह मिलने लगी। उनकी गायकी में जुदाई की उदासी और प्यार की मस्ती का अनोखा संगम था। दुनियाभर में फैंस उनके दीवाने हो गए।
पद्मश्री (2006) से पद्मभूषण (2025) तक, सम्मानों की झड़ी लगी। 26 फरवरी 2024 को उनका स्वर्गवास हो गया, लेकिन ‘चिट्ठी आई है’ जैसी रचनाएं उन्हें जीवित रखती हैं। यह गजल गजल जगत की दुनिया बदलने वाली साबित हुई।