जब भारत-चीन जंग ने देश को झकझोर दिया था, तब गुजरात के एक मंच पर दस साल के पंकज उधास ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाकर इतना प्रभावित किया कि लोग खुशी से 51 रुपये दे बैठे। यह पहली प्रस्तुति उनके उज्ज्वल भविष्य की झलक थी। जन्म 17 मई 1951 को जेतपुर में हुआ, जहां संगीत घर की धड़कन था।
पिता केशुभाई संगीत प्रेमी नौकरशाह, मां जीतूबेन गायिका, भाई मनहर-नर्मल प्रोफेशनल कलाकार। पंकज ने पढ़ाई के साथ संगीत को अपनाया—बीएससी मुंबई से, राजकोट में तबला, शास्त्रीय उस्तादों से दीक्षा। ‘कामना’ (1972) फ्लॉप के बाद विदेशी मंचों पर धूम मचाई।
लौटकर ‘चिट्ठी आई है’ ने धमाल मचाया। एल्बम ‘आहट’ (1980), ‘मुकर्रर’, ‘महफिलन’ आदि ने गजल को नई ऊंचाई दी। रोमांस भरी आवाज ने लाखों को बांधा। पद्म श्री-भूषण से नवाजे गए। 26 फरवरी 2024 को मुंबई में 72 साल की उम्र में अलविदा। उनका योगदान संगीत इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।