रोमांटिक फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ का विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। सपा विधायक पंकज मलिक ने सेंसर बोर्ड और सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब समाज को जाति-धर्म के आधार पर बांटने की साजिश है। लखनऊ से विशेष बातचीत में उन्होंने मौजूदा हालात पर चिंता जताई।
‘इस सरकार में लगातार विवाद खड़े होते हैं—कभी धार्मिक स्थलों पर, कभी जातिगत टारगेटिंग से,’ मलिक ने कहा। फिल्में अब इस खेल का हिस्सा बन गई हैं, जो सामाजिक एकता को कमजोर कर रही हैं।
बोर्ड की नाकामी पर उन्होंने तंज कसा, ‘केंद्र सरकार के दायरे में आने वाला सीबीएफसी ऐसी आपत्तिजनक सामग्री को मंजूरी कैसे देता है? पहले ही रोक लगानी चाहिए थी।’ ‘घूसखोर पंडित’ जैसे पुराने मामलों का जिक्र कर वे लगातार हो रही ऐसी फिल्मों से सतर्क हुए।
सकारात्मक दृष्टिकोण देते हुए मलिक बोले, ‘फिल्मकार नेताजी मुलायम सिंह, चौधरी चरण सिंह, गांधीजी व भगत सिंह पर बायोपिक बनाएं, जिन्होंने समाज-राज्य का निर्माण किया। इससे युवा सही राह पाएंगे।’ इस फिल्म को गलत संदेश फैलाने वाला बताते हुए उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप और भविष्य में रोक की अपील की।
विधायक के ये विचार न केवल विवाद को हवा दे रहे हैं, बल्कि फिल्म सेंसरशिप और सामाजिक सद्भाव पर व्यापक चर्चा को जन्म दे रहे हैं।