अभिनेत्री रोजनी खान, जो कैंसर को मात देकर जीवित हैं, अपनी प्रथम मक्का हज यात्रा से वापस लौटीं तो ऑनलाइन ट्रोल्स ने उनके पहनावे और पुरानी तस्वीरों को निशाना बनाया। पवित्र यात्रा के बावजूद यह विवाद उनकी आस्था और जीवन पर सवाल उठा रहा है।
वापसी के तुरंत बाद यूजर्स ने सोशल मीडिया पर हमला बोला। कपड़ों पर टिप्पणियां, पुरानी फोटोज हटाने की मांग और आस्था पर शक जैसी बातें आम हो गईं। उनकी कैंसर लड़ाई को भी इस बहस में घसीटा गया।
रोजनी ने शांति से जवाब दिया, ‘लोगों में दया की कमी खलती है। कैंसर मेरी जिंदगी-मरण की लड़ाई था। सांस लेने और कल तक जीने की कोशिश के बीच दुआएं दिल से आईं, न कि प्रदर्शन के लिए। शरीर टूटे तो आस्था ही सहारा बनी।’
उन्होंने कहा, ‘मेरा धर्म मुझे खुद को भुलाने को नहीं कहता। बीमारी का सहारा लेकर कपड़े या भक्ति जज करना दर्दनाक है। कैंसर से जंग जीतकर इंसान अपनी पहचान नहीं खोता।’
दुनिया को प्रसन्न करने की दुआ नहीं, जीने की प्रार्थना की थी- रोजनी ने स्पष्ट किया। आगे बोलीं, ‘कैंसर के बाद ट्रोल्स का डर नहीं। जीवन ने करुणा, इंसानियत और आदर सिखाया। किसी के लिबास या विश्वास पर फैसला देने से पहले उसके गुजारे हालात सोचें।’
यह घटना डिजिटल दुनिया में संवेदनहीनता को उजागर करती है, जहां रोजनी जैसी मजबूत महिलाओं को भी आंखें दिखाई जाती हैं।