अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने हाल ही में उद्योग के काले पहलू को उजागर किया। करियर की शुरुआत में एक भरोसेमंद व्यक्ति ने उनका साथ छोड़ दिया और नुकसान पहुंचाया। इस धोखे ने उन्हें जीवन का महत्वपूर्ण पाठ दिया।
उन्होंने बताया, ‘मैं भोली थी। हर कोई आप पर नजर नहीं रखता। प्रतिस्पर्धा का नाम सुनते ही कुछ लोग आपकी राह में रोड़ा बन जाते हैं।’ यह तजुर्बा दुखदायी था, लेकिन इससे उन्होंने अपनी क्षमताओं का बचाव करना सीखा।
ऋचा अब इंडिपेंडेंट फिल्मकारों के लिए दरवाजे खोल रही हैं। वे कहती हैं, ‘लोग सोचते हैं हमसे बात करना मुश्किल है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं। मजबूत पटकथा, ईमानदार अभिव्यक्ति और मार्मिक कथा ही मायने रखती है। संपर्क करें, हिचकिचाएं नहीं।’
वे शुरुआती संघर्षों में उपेक्षित महसूस करने की बात भी करती हैं। युवा रचनाकारों से अपील है कि अच्छे रोल्स के लिए बेझिझक संपर्क करें। इसी बीच, वे एक अनोखी नॉन-फिक्शन सीरीज तैयार कर रही हैं।
यह प्रोजेक्ट परिचित स्थानों को तरोताजा नजरिए से दिखाएगा। कम चर्चित कहानियों पर जोर देते हुए भारत की सांस्कृतिक गहराई और लोगों के हौसले को रेखांकित करेगा। यात्रा, परंपराओं और जीवन की विविधताओं को समेटते हुए यह दर्शकों को एक immersive सफर पर ले जाएगा।
समकालीन दृष्टिकोण से संस्कृति का यह चित्रण उत्सुकता और भावुकता जन्म देगा। ऋचा चड्ढा का सफर प्रेरणादायक है—धोखे से सीख लेकर वे अब दूसरों को रास्ता दिखा रही हैं।