बॉलीवुड के दिग्गज रवि टंडन संगीत के दीवाने थे। आगरा में 1935 में पैदा हुए रवि कॉलेज में किशोर, रफी के गीतों से सराबोर रहते। सहपाठी उन्हें रचनात्मक व्यक्तित्व का धनी मानते थे। संगीत उनके लिए मन की शांति और रचनात्मकता का स्रोत था।
मुंबई में सिनेमा की दुनिया में प्रवेश कर वे जूनियर कलाकार बने। यहां पृष्ठभूमि संगीत की शक्ति जानी। गीत उनके लिए किरदारों की भावनाओं का आईना थे।
उनकी ब्लॉकबस्टर ‘खेल खेल में’ में आर.डी. बर्मन के धुनें कहानी को नई ऊंचाई दे दीं। लोकप्रिय गाने दर्शकों के दिलों पर छा गए। ‘मजबूर’, ‘खुद्दार’, ‘जवाब’ जैसी हिट्स में संगीत का जादू झलकता था। वे कहते, गाने पटकथा का हिस्सा हों।
रवीना टंडन ने पिता की कला प्रेम की मिसाल दी। उनके इंटरव्यू में यह साफ था कि संगीत जीवन का आधार है। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे संगीतकारों से उनका तालमेल लाजवाब रहा।
86 साल की उम्र में 11 फरवरी 2022 को दुनिया छोड़ गए। रवि टंडन की कमी हमेशा खलेगी, पर उनकी संगीतमय फिल्में चिरस्थायी हैं।