फिल्म जगत के दिग्गज शेखर कपूर ने जीवन के रहस्यों पर खुलकर चर्चा की। क्या हम अपने भाग्य के मालिक हैं या सब पहले से लिखा हुआ है? उनके शुरुआती दिनों की कहानी इस सवाल को और गहरा बनाती है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने लंदन पहुंचे शेखर के सपनों में था एक तयशुदा भविष्य। पढ़ाई, नौकरी, शादी, स्थिरता—कोई रिस्क नहीं। लेकिन किस्मत ने करवट ली। कोर्स पूरा कर जॉब्स करने के बाद उन्होंने अचानक त्याग दिया। आगे का रास्ता धुंधला था, फिर भी कदम बढ़ाए।
फिर शुरू हुआ बहुआयामी सफर। एक्टिंग से निर्देशन, टीवी शोज, अंतरराष्ट्रीय थिएटर—लंदन, ब्रॉडवे, यूरोप, दुबई। भारत में डिजिटल स्टार्टअप की शुरुआत और ग्लोबल टीचिंग। मौके आए तो थाम लिया, बिना किसी ब्लूप्रिंट के।
बड़ा प्रश्न यही है—क्या कर्मफल या स्वयं की इच्छा? हम जन्म, इश्क, दर्द या अंत नहीं चुनते। कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार भाग्यदेव रास्ते प्रशस्त कर देते हैं। शेखर की बातें जीवन को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा देती हैं।