माघ मेले के पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान का स्वामी गोपालाचार्य ने खुलकर समर्थन किया है। ऋषिकेश की अखिल भारतीय संत समिति के मुखिया ने स्पष्ट कहा कि शंकराचार्य पद सनातन धर्म का शिखर है, जिसे कोई भी हासिल नहीं कर सकता।
तीन दशकों से संत समाज के मुद्दों पर सक्रिय इस संगठन के अनुसार, समाज में व्याप्त भ्रम को दूर करने की आवश्यकता है। ‘योगी जी संत हैं और उनका मत सटीक है। यह पद सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक है।’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा गौ रक्षा पर उठाए सवालों ने विवाद को भड़काया है। गोपालाचार्य महाराज बोले, ‘उनकी स्वीकार्यता समाज की है, मगर वैधता संतों पर निर्भर। परंपरावादी चिंतित हैं।’
एकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा, ‘संतों और नेताओं को मतभेद भुलाना चाहिए। नास्तिकता के हमलों का मुकाबला संगठित रूप से करें।’
स्वामी निर्मल दास ने संवैधानिक नजरिए से योगी को सही ठहराया, किंतु चेतावनी दी, ‘सरकार निर्धारण नहीं कर सकती, विद्वत परिषद का क्षेत्र है।’
अखिलेश युग के लाठीचार्ज को संदर्भित कर बोले, ‘संभवतः तब नियमों का पालन हुआ, लेकिन आज की स्थिति गलत है।’
यह बहस धार्मिक पदानुक्रम और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच संतुलन की मांग करती है, जो सनातन मूल्यों को मजबूत बनाए।