मुंबई। अखलाक मुहम्मद खान उर्फ शहरयार की शायरी ने उर्दू अदब को नई ऊंचाइयां दीं। 13 फरवरी उनकी पुण्यतिथि है, इस खास मौके पर जानते हैं कैसे एक नाम ने बदली उनकी तकदीर।
बरेली के साधारण घर में 1936 में जन्मे अखलाक ने AMU से उर्दू साहित्य सीखा। शुरूआती रचनाएं उनके नाम से छपीं, जिनमें जिंदगी की सादगी और दर्द साफ झलकता। धीरे-धीरे महसूस हुआ कि खास तखल्लुस चाहिए।
‘शहरयार’ बनते ही उनकी गजलें-नज्में चमक उठीं। शहर के बादशाह सरीखी ये रचनाएं आम बोलचाल से गहरे अर्थ निकालतीं, सबकी जुबां पर चढ़ गईं।
फिल्म ‘उमराव जान’ के लोकार्पित गीतों ने स्टारडम दिलाया। ‘दिल चीज क्या है’ जैसे नगमेंे क्लासिक बन चुके। सम्मान में साहित्य अकादमी और पद्मश्री हासिल किए। उनका निधन 2012 में हुआ, लेकिन कلام दिलों में बस गया।