मशहूर फिल्ममेकर सुभाष घई ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर प्रशंसकों से विशेष अपील की है। सोशल मीडिया पर उन्होंने जोर देकर कहा कि इस देशभक्ति गीत के गहरे अर्थों को ग्रहण कर ही इसे गाया जाए।
इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव।’ यह हमारी संस्कृति और आत्मा का प्रतीक है। हिंदी-अंग्रेजी में अर्थ समझें, ताकि छह अंतरे सच्चे मन से गाए जा सकें। जय भारत।
1870 के दशक में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा आनंदमठ में सृजित, गीत के संस्कृत छंद मातृभूमि की दिव्यता दर्शाते हैं। बाद की पंक्तियां भारत की रंगीन वादियों का चित्रण करती हैं। टैगोर के संगीत से सजकर 1896 कांग्रेस सत्र में पहली बार प्रस्तुत हुआ।
आजादी की लड़ाई में प्रेरणा स्रोत बना। 1947 में संविधान सभा की शुरुआत इससे हुई और 1950 में राष्ट्रीय गीत बना।
घई का व्हिसलिंग वुड्स नई पीढ़ी को तैयार कर रहा है। रॉकेटशिप शॉर्ट फिल्म का ट्रेलर आया, रिलीज का इंतजार। उनका आह्वान राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।