फिल्मकार शेखर कपूर ने दूरदर्शन के दौर की याद ताजा की और ‘उड़ान’ को देश बदलने वाला माध्यम बताया। एक्स पर तस्वीर शेयर कर उन्होंने कहा कि आधुनिक टेलीविजन को मूल्यवान कंटेंट की भूख है।
‘उड़ान’ 1980 के दशक का सुपरहिट था, जो 1991 में समाप्त हुआ। एक चैनल के जमाने में इसकी लोकप्रियता बेमिसाल थी। कपूर ने अपनी कलेक्टर भूमिका का जिक्र किया, ‘लोग मुझे कलेक्टर साहब कहकर घेर लेते थे, खासकर छोटे शहरों में।’
इस धारावाहिक ने खासकर महिलाओं को प्रेरित किया। ‘मैं ऐसी कई अफसर महिलाओं से मिला हूं जो कहती हैं कि ‘उड़ान’ ने ही उन्हें आईएएस-आईपीएस बनने का जज्बा दिया।’
कपुर ने चिंता जताई कि आज टीवी सनसनीखेज ड्रामा तक सिमट गया है। ‘पुराने टीवी में नैतिकता, चुनौतियां और उम्मीद थी। समाज के तनावों के बीच ऐसी कहानियां लोगों को एकजुट कर सकती हैं।’
उनकी यह अपील टीवी चैनलों के लिए चुनौती है। क्या उद्योग ‘उड़ान’ की तरह प्रेरणादायक कंटेंट लाएगा, जो मनोरंजन के साथ समाज निर्माण भी करे?