मुंबई के एक बुकस्टोर में अनुपम खेर का दिल भर आया जब उन्होंने अपनी अंग्रेजी किताबों को प्रमुखता से सजाया देखा। हिंदी माध्यम से निकले इस सितारे ने ‘डिफरेंट बट नो लेस’ सहित चार लाइफ-कोचिंग बुक्स लिखकर साहित्य जगत में धमाल मचा दिया है।
सोशल मीडिया पर पोस्ट में खेर ने भावुक होकर कहा, ‘यह दृश्य मुझे बहुत आभारी बनाता है। भाषा कोई बंधन नहीं, सपनों की उड़ान अनंत है।’ अभिनय से लेखन तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ‘राइटर’ जैसा टैग उनके नाम जुड़ेगा।
किताबें पाठकों को जीवन की सीख, चुनौतियों पर विजय और सकारात्मक सोच का पाठ पढ़ाती हैं। हिंदी शिक्षा के बावजूद अंग्रेजी लेखन चुनौतीपूर्ण लेकिन विजयी रहा। यह पल सिद्ध करता है कि उम्र, पृष्ठभूमि या भाषा महत्वाकांक्षाओं को रोक नहीं सकती।
अनुपम खेर की सफलता युवाओं को संदेश देती है कि लगन से लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। उनकी कहानी फिल्मी दुनिया से कहीं आगे बढ़कर प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है।