मुंबई के फिल्मी परिवेश में केसी बोकाडिया जैसे निर्देशक दुर्लभ हैं, जिनकी अनोखी शैली और बेमिसाल कहानियां दर्शकों को आज भी आकर्षित करती हैं। मेड़ता सिटी, नागौर में जन्मे इस फिल्मकार ने 60 से ज्यादा फिल्मों से बॉलीवुड को समृद्ध किया। उनकी पुरानी फिल्में भी नई लगती हैं।
निर्माण के मोर्चे पर ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘तेरी मेहरबानियां’, ‘नसीब अपना अपना’, ‘हम तुम्हारे हैं सनम’, ‘प्यार जिंदगी है’ और ‘मैं तेरा दुश्मन’ जैसी हिट्स उनके नाम हैं। निर्देशित फिल्मों में ‘फूल बने अंगारे’, ‘पुलिस और मुजरिम’, ‘इंसानियत के देवता’, ‘कुदरत का कानून’ तथा ‘आज का अर्जुन’ प्रमुख हैं। ‘पाप का अंत’ में सह-निर्माण उनका योगदान रहा।
बॉलीवुड के सुपरस्टार्स की लिस्ट लंबी है – राजेश खन्ना, जीतेंद्र, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, धर्मेंद्र, रजनीकांत, मिथुन चक्रवर्ती, विनोद खन्ना, गोविंदा, जैकी श्रॉफ, अनिल कपूर, सलमान खान, शाहरुख खान, अजय देवगन, अक्षय कुमार व सनी देओल। बोकाडिया ने कईयों को स्टारडम की मंजिल दिखाई।
बच्चन के साथ उनका साथ निभाना यादगार है। बोफोर्स घोटाले के मुश्किल दिनों में जब सब पीछे हटे, बोकाडिया ने ‘आज का अर्जुन’ बनाई, जया प्रदा के साथ। केस जीतने पर बच्चन ने बोकाडिया को पहला मेहमान बताया। यह दोस्ती उद्योग की मिसाल बनी।
परिवार, प्यार, मानवता और न्याय पर केंद्रित उनकी फिल्में आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी रहीं। अनोखे विचारों ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। 2019 में तमिल ‘रॉकी: द रिवेंज’ उनका अंतिम निर्देशन था, श्रीकांत-नासिर अभिनीत। केसी बोकाडिया सिद्ध करते हैं कि सिनेमा का असली जादू कहानी में बसता है।