40 साल से अमिताभ बच्चन जलसा पर रविवारीय फैन मिलन की परंपरा निभा रहे हैं। ‘कुली’ फिल्म की दुर्घटना के बाद शुरू हुई यह परंपरा आज भी जीवंत है।
पिछले रविवार को उन्होंने पिता की पंक्ति शेयर की, जिस पर फैंस ने दिल खोलकर तारीफ की। खुशी से सराबोर अमिताभ ने एक्स पर थैंक्स नोट पोस्ट किया। ‘आपके विचारों ने बाबूजी की कविता “क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी क्या करूं” याद दिलाई।’
कविता के भावुक बोल: ‘उस नयन से बह सकी कब इस नयन की अश्रु धारा… क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी क्या करूं।’ प्रशंसकों ने इसे अपनी जिंदगी से जोड़ा, कहा- अमिताभ जैसे को मिट्टी भी नहीं बदल सकती।
कविता रचने की पृष्ठभूमि की कहानी साझा करने का संकेत दिया। पिता की एकाकी कविताओं में ‘कोई गाता मैं सो जाता’, ‘मेरा तन भूखा मन भूखा’ प्रमुख हैं।
फैंस और सितारे के इस संवाद ने साहित्यिक धरोहर को सोशल मीडिया पर जीवंत कर दिया, अमिताभ की विरासत को मजबूत किया।