छोटे पर्दे के सितारे अर्जुन बिजलानी ने टीवी प्रोडक्शन की सच्चाई बयां की। बाहर से आकर्षक लगने वाली इस दुनिया में लंबे घंटे काम करना कलाकारों के लिए अभिशाप बन गया है। 8 घंटे शिफ्ट की संभावना को उन्होंने खारिज कर दिया।
शूटिंग का दिन सुबह 7 बजे शुरू हो जाता है। घर से निकलना 8 बजे जरूरी, ताकि ट्रैफिक में फंसने से बचा जा सके। मेकअप रूम में घंटों बीतते हैं, फिर सेट पर लगातार काम। रात को देरी से पैक-अप के बाद घर पहुंचना मुश्किल होता है।
शरीर को आराम न मिलने से थकान जमा होती जाती है। अर्जुन ने पुराने दिनों का जिक्र किया जब शिफ्टें 18 घंटे तक चलती थीं। वर्तमान में 12 घंटे की सीमा बेहतरी है, लेकिन पर्याप्त नहीं।
साप्ताहिक एपिसोड बनाने के लिए यह मेहनत अनिवार्य है। कम समय में काम घटेगा तो क्वालिटी प्रभावित होगी। अर्जुन ने संतुलन पर जोर दिया—सेहत का ध्यान रखते हुए कंटेंट मजबूत रखना।
उनके खुलासे से उद्योग में बदलाव की बहस तेज हो सकती है। दर्शकों को अच्छा शो देने वाले कलाकारों की भलाई सुनिश्चित करना समय की मांग है।