असम सरकार रंगमंच को नई दिशा देने के लिए कमर कस चुकी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को नवनिर्मित शिवसागर नाट्य मंदिर उद्घाटित करते हुए आधुनिक बुनियादी ढांचे और कलाकारों की सुरक्षा पर आधारित योजना की रूपरेखा पेश की। उन्होंने कहा कि असम की रंगमंच विरासत को संरक्षित कर वैश्विक पटल पर स्थापित करना हमारा लक्ष्य है।
पिछले वर्षों में ज्योति-बिष्णु कला केंद्र, दामोदरदेव अंतरराष्ट्रीय सभागार, बदला पद्म अता सभागार और लखीमपुर का अत्याधुनिक सभागार जैसे संस्थान बने हैं। इनसे रंगमंचकारों को नए अवसर मिले और असमिया नाटकों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई।
विभिन्न जिलों में सभागारों और सांस्कृतिक केंद्र स्थापित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के कलाकार घर के पास ही अपनी कला प्रदर्शित कर सकें। यह विकेंद्रीकरण रंगमंच को जिंदा रखने की कुंजी है।
सरकार ने वित्तीय सहायता, पेंशन योजना का विस्तार, कार्यशालाओं के लिए ग्रांट और स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्रदान की है। सीएम सरमा का मानना है कि इन प्रयासों से सृजनात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
शिवसागर नाट्य मंदिर का जीर्णोद्धार उन सांस्कृतिक धरोहरों को निखारने का संकेत है, जिन्होंने असम के बौद्धिक जीवन को दशकों से प्रेरित किया है।