हर स्टारकिड की जिंदगी आसान नहीं होती, खासकर अभिषेक बच्चन की। महानायक अमिताभ और जया के बेटे का जन्म 5 फरवरी 1976 को हुआ। शुरू में उनका लक्ष्य बिजनेस प्रोफेशनल बनना था, न कि हीरो।
अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट पढ़ते हुए अभिषेक कॉरपोरेट की चमक में खोए थे। पिता के दिवालिया होने और फिल्मों में वापसी ने उनके मन का कॉरिडोर बदल दिया। परिवार की जिम्मेदारी ने उन्हें मुंबई बुला लिया।
‘रिफ्यूजी’ (2000) से शुरुआत हुई, लेकिन फ्लॉप्स का सिलसिला चला। आलोचनाओं और तुलनाओं ने हौसला तोड़ा, लेकिन ‘युवा’ (फिल्मफेयर जीत), ‘गुरु’ (सराहनीय भूमिका), ‘बंटी और बबली’, ‘धूम’ और ‘दिल्ली-6’ ने पहचान बनाई। ‘सरकार’ ने और सम्मान दिलाया।
ओटीटी कंटेंट ने करियर को नई जिंदगी दी। बिजनेस की वो अधूरी पढ़ाई आज निवेशों में झलकती है—आईपीएल टीम, प्रॉपर्टी और स्टार्टअप्स में पैसा लगाया। अभिषेक की कहानी प्रेरणा है कि सही समय पर सही फैसला ही इतिहास रचता है।