संजय मिश्रा, जो अपनी सहज अभिनय शैली से दर्शकों को बांध लेते हैं, इन दिनों ‘वध 2’ को लेकर सुर्खियों में हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि निर्देशक ही अभिनेता के प्रदर्शन को अमर बनाते हैं।
संजय ने खुलासा किया, ”मैंने ‘वध 2’ में निर्देशक की कल्पना को अपनाया। अभिनेता का कितना भी टैलेंट हो, निर्देशक तय करते हैं कि वह स्क्रीन पर कैसे लगेगा। मेरी सफलता का बड़ा हिस्सा उनका है।”
बात को रोचक बनाते हुए कहा, ”फिल्म निर्देशक का कैनवास है, जहां अभिनेता रंग भरते हैं। थोड़ा किरदार का, थोड़ा निजी का, सब मिलाकर कृति बनती है।”
शंभूनाथ भूमिका में पत्नी मंजू से बातचीत का लय निर्देशक ने रचा। ”खामोशी कब गूंजे, शब्द कब चुभें—यह उनका हुनर है। गलत हैंडलिंग से टैलेंट बर्बाद, सही से तो जादू।”
अपने संघर्षमय बचपन का जिक्र करते हुए बोले, ”चार भाई-बहनों वाले घर में कम पैसे से गुजारा। उत्सवों में भी मुश्किलें। यही अनुभव मेरे संवादों को सच्चा बनाते हैं।”
अंत में कहा, ”जीवन की कमाई सही निर्देशन से पर्दे पर उभरती है।” फिल्म 6 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में।