‘गोदान’ फिल्म गोमाता के सम्मान में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो निर्देशक अमित प्रजापति ने कामधेनु इंटरनेशनल प्रोडक्शन के साथ मिलकर तैयार की है। यह चित्र गोमाता के सांस्कृतिक, वैज्ञानिक व सामाजिक योगदान को प्रमुखता से दर्शाती है, जिसमें पंचगव्य की उपयोगिता पर विशेष बल दिया गया है।
साध्वी ममता कुलकर्णी, पहले एक प्रसिद्ध अभिनेत्री रह चुकी हैं, ने फिल्म की भूरि-भूरि प्रशंसा की। बातचीत में उन्होंने कहा, ‘यह प्रेरक फिल्म हमारी परंपरा, ज्ञान और संवेदनाओं को जीवंत करती है। सभी को देखनी चाहिए, क्योंकि गाय का उल्लेख वेद-पुराण ही नहीं, बाइबिल-कुरान में भी मिलता है। गौहत्या इन ग्रंथों में निषिद्ध है—गाय तो सर्वधर्मों में मातृस्वरूप है।’
अपने आध्यात्मिक सफर पर बोलते हुए ममता ने खुलासा किया कि लंबे तप-ध्यान से उन्होंने समाधि की प्राप्ति की। ‘भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का मैंने प्रशिक्षण व दर्शन देखा है। गायें शीघ्र दूध देना त्याग देंगी, जैसे पानी की बर्बादी हो रही है। जागृति का समय है।’
ममता ने धार्मिक उदाहरण दिए—इस्लाम में अल्लाह के बाद मां का तिगुना महत्व, गीता का कर्मफल सिद्धांत। ‘हम विकृत मानसिकता के शिकार हैं, जिससे विश्व में संकट बढ़ रहे हैं। गाय हानि से पूर्व गहन विचार करें। ‘गोदान’ सोच बदलने वाली साबित होगी, एक नई जागृति लाएगी।’