बॉलीवुड के शोमैन सुभाष घई का फिल्मी सफर प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने न केवल हिट फिल्में दीं, बल्कि उद्योग के हर पहलू को छुआ। साक्षात्कार में उन्होंने 80-90 के दौर से डिजिटल क्रांति तक के रोचक बदलाव साझा किए।
करीब 55 साल पहले पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में अभिनय कोर्स के दौरान घई ने दुनिया भर की फिल्में देखीं। यह ज्ञान उनके पूरे करियर का आधार बना। पढ़ाई के बाद उन्होंने क्रमशः अभिनेता, लेखक और निर्देशक के रूप में नौ वर्ष बिताए। ‘पूर्ण समझ के बिना सफलता अधूरी है,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
फिर उन्होंने 18-19 फिल्मों का निर्देशन किया, कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड किया, डिस्ट्रीब्यूशन और थिएटर बिजनेस में उतरे। इस समग्र दृष्टि से प्रेरित होकर उन्होंने फिल्म अकादमी शुरू की।
‘युवा कलाकारों को सही दिशा देने के लिए यह स्कूल है। 2-3 साल की ट्रेनिंग में वे इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से जुड़ते, अभ्यास करते और तैयार होते हैं।’
सिनेमा के विकास पर घई बोले, ‘समाज बदलता है तो फिल्में भी। 30-30 साल में नई प्रतिभाएं आती हैं, जो समयानुसार कहानियां गढ़ती हैं। पुराने दौर की फिल्में आज के सजग दर्शकों के अनुरूप नहीं।’
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उत्साहित होकर उन्होंने कहा, ‘ओटीटी, सीरीज और टीवी ने कहानीकारों के लिए नई राहें खोलीं। अब टैलेंट को कई मंच मिले हैं।’ उनका दृष्टिकोण बॉलीवुड के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है।