भारतीय सिनेमा ने देशभक्ति को एक नया रूप दिया है। दशकों से अभिनेता स्वतंत्रता सेनानियों, जांबाज सिपाहियों और आधुनिक योद्धाओं के किरदार निभाकर राष्ट्र को एकजुट करते आए हैं। मनोज कुमार से शुरू होकर विक्की कौशल तक यह परंपरा मजबूत हुई है।
‘भारत कुमार’ मनोज कुमार ने ‘शहीद’ से भगत सिंह का बलिदान दिखाया। स्वयं निर्देशित ‘उपकार’, ‘पूरब-पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा मकान’ और ‘क्रांति’ ने देशप्रेम को घर-घर पहुंचाया।
सनी देओल ने ‘बॉर्डर’ में 1971 की लड़ाई लड़ी, ‘गदर’ में प्रेम और देशभक्ति का संगम दिखाया। ‘बॉर्डर 2′ ने फिर से जोश भरा।
अक्षय कुमार आधुनिक दौर के चेहरा हैं—’हॉलिडे’ का सतर्क अफसर, ‘एयरलिफ्ट’ का उद्धारक, ‘केसरी’ का हवलदार, ‘रुस्तम’ का नाविक। अजय देवगन ने भगत सिंह और कारगिल के मेजर को जीवंत किया।
आमिर की ‘लगान’ ने अंग्रेजों को ललकारा, ‘रंग दे बसंती’ ने युवाओं को जगाया, ‘सरफरोश’ ने आतंकवाद से लड़ा। शाहरुख ने ‘स्वदेश’ में गांव लौटे, ‘चक दे!’ में टीम को चैंपियन बनाया।
सिद्धार्थ ने ‘शेरशाह’ में विक्रम बत्रा की वीरता उतारी। विक्की कौशल की ‘उरी’ ने सर्जिकल स्ट्राइक दिखाई, ‘सरदार उधम’ ने ब्रिटिश अत्याचार का बदला लिया, ‘सैम बहादुर’ ने रणनीति सिखाई।
बॉलीवुड के ये नायक साबित करते हैं कि सिनेमा केवल तमाशा नहीं, बल्कि देशभक्ति का माध्यम भी है।