सुभाष घई, जिन्हें बॉलीवुड का शोमैन कहा जाता है, ने अपनी फिल्मों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। उनका एक रोचक राज था- जिन हीरोइनों को उन्होंने स्टार बनाया, उनके नाम ‘एम’ से शुरू होते थे। यह लकी चार्म उनकी हिट्स का राज था।
नागपुर में 24 जनवरी 1945 को पैदा हुए। पिता दिल्ली में डाक्टर। बंटवारे के बाद दिल्ली आए। रोहतक से डिग्री ली, फिर एफटीआईआई पुणे से ट्रेनिंग।
एक्टर बनने की कोशिश की। ‘अराधना’ से लेकर ‘नाटक’ तक कई फिल्में कीं, पर नाम न हुआ। फिर निर्देशन की दुनिया में कूद पड़े।
‘कालीचरण’ (1976) धमाकेदार डेब्यू। उसके बाद ‘हीरो’, ‘क्रोधी’, ‘राम-लखन’, ‘खलनायक’, ‘परदेस’, ‘ताल’ जैसी सुपरहिट्स।
मीनाक्षी (‘हीरो’), माधुरी (‘राम-लखन’), मनीषा (‘सौदागर’), महिमा (‘परदेस’) को इंडस्ट्री में उतारा। ‘एम’ अक्षर को भाग्यशाली मानते थे।
फिल्म फाइनेंसिंग और इंश्योरेंस के नए आयाम दिए। व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल खोला, जो टॉप स्कूल है।
2006 में ‘इकबाल’ के लिए नेशनल अवॉर्ड। सुभाष घई की कहानी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।